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एम्वे् इंडिया ने भारत की पारंपरिक जड़ी-बूटियों पर विश्वास मजबूत किया

By Outcome.c :15-03-2019 09:03


हेल्थ्केयर पर जागरुकता बढ़ाने के लिए सेमिनार आयोजित किए गए 

जयपुर, देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी डायरेक्ट सेलिंग कंपनी, एम्वे  इंडिया, ने हाल ही में कई सेमिनार आयोजित किए जिनका मकसद भारत की पारंपरिक जड़ी-बूटियों और आधुनिक रिसर्च के माध्यम से स्वास्थ्य रक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। इन सेमिनारों को विशेषज्ञों द्वारा संबोधित किया गया। देश के 13 बाजारों में आयोजित किए गए इस सेमिनार में भाग लेने के लिए कंपनी ने प्रसिद्ध आयुर्वैदिक विशेषज्ञ डॉ. गौहर वात्स्यायन को आमंत्रित किया। इन शहरों में लखनऊ, मुंबई, अहमदाबाद और पुणे जैसे शहर शामिल थे। सेमिनारों में आयुर्वेदिक विशेषज्ञ ने बेहतर स्वास्थ्य बरकरार रखने में भारतीय पारंपरिक जड़ी-बूटियों के महत्व और भूमिका पर प्रकाश डाला।

सेमिनार की शुरुआत में डॉ. वात्स्यायन ने किसी व्यक्ति के जीवनकाल में अच्छा स्वास्थ्य बरकरार रखने में जड़ी-बूटियों के फायदों पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय पारंपरिक जड़ी बूटियों, जैसे अश्वगंधा, तुलसी, ब्राह्मी, त्रिफला, विभातकी और हरिताकी आदि जड़ी-बूटियों के बारे में अपने विचारों को साझा किया। उन्होंने बताया कि आजकल के जीवन में व्यक्तियों के खानपान की आदतों में काफी बदलाव आया है। इससे रोजाना कई शारीरिक चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। रोजाना के जीवन और खानपान में हम जड़ी बूटियों को शामिल कर स्वस्थ रह सकते हैं। उन्होंने कुछ सामान्य चुनौतियों के संबंध में बताया और रोजमर्रा के जीवन में स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए कई हेल्थकेयर टिप्स भी दिए। 

डॉ. वात्स्यायन ने सेमिनार में कहा, “जड़ी बूटियां स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और अच्छा स्वास्थ्य बरकरार रखने में हमारी मदद करती है। इसका सेवन चुस्त-दुरुस्त और तंदुरुस्त लोग भी कर सकते हैं। परिकल्पना या अनुमान के आधार पर कहा जा सकता है कि आनुवांशिक रूप से संशोधित जीवों (जेनेटिकली मोडीफाइड ऑर्गेनिज्मआ/ जीएमओ) के तत्वोंि से असहनशीलता और एलर्जी के मामलों में बढ़ोतरी होती है। यही कारण है कि हमें हर्बल प्रॉडक्ट्स और सप्लिमेंट्स का चुनाव करते समय सामग्री और उसके स्रोतों पर भी ध्यान देना चाहिए।* इसके अलावा हर्बल प्रॉडक्ट्स का चयन करते हुए उसमें सक्रिय सामग्री या तत्वों का पूरा दोहन करना आवश्यक है। केवल कुछ कंपनियां ही सामग्री और उनके स्रोत के बारे में पारदर्शिता बरकरार रखती हैं। उपभोक्ताओं को हर्बल प्रॉडक्ट्स का सेवन करते समय इन सभी पहलुओं के बारे में जागरूक रहना चाहिए।” 

एम्वेर इंडिया में न्यूट्रिशन एंड वेलनेस कैटेगरी के हेड श्री अजय खन्ना ने इस पहल पर कहा, “एम्वे  में हमारा फोकस लोगों को स्वस्थ जिदंगी जीने में मदद करना है। हमारा मानना है कि पोषक तत्वों के सेवन में सुधार और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना स्वास्थ्य रक्षा के लिहाज से कुछ सबसे जरूरी कदमों में शामिल है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और हर्बल प्रॉडक्ट्स की बढ़ती स्वीकार्यता ने एम्वेा को पिछले साल न्यूट्रिलाइट ट्रैडिशनल हर्बल रेंज को लॉन्च करने के लिए प्रोत्साहित किया। हम गर्व महसूस करते हैं कि हमारे प्रॉडक्ट्स की रेंज में भरपूर शुद्धता, सुरक्षा और शक्ति प्रचुर मात्रा में मौजूद है। इसके पीछे न्यूट्रिलाइट की वैज्ञानिक अनुसंधान की मजबूत विरासत है और यह भारतीय पारंपरिक बुद्धिमत्ता पर आधारित है। यह रेंज ऑर्गेनिक सर्टिफाइड हर्ब्सू और डीएनए फिंगर प्रिंट हर्ब्स् पर आधारित है। यह अपने आप में बेहद विशेष है फिलहाल भारत में उपलब्धु है।“ 

उन्होंने कहा, “सर्टिफाइड आर्गेनिक फार्म से आने वाली सर्टिफाइड ऑर्गेनिक हर्ब्सै भारत सरकार की पहल नेशनल प्रोग्राम ऑन आर्गेनिक प्रॉडक्शन (एमपीओपी) द्वारा तय किए गए मानकों पर एकदम खरी उतरती है। भारत सरकार ने यह पहल जैविक कृषि के विकास के लिए 2000 में की थी।” 

*स्रोत : Genetically Modified Wheat, Wheat Intolerance, and Food Safety Concerns

Source:Agency

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