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नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष मो.सगीर के खिलाफ दर्ज हुआ दुष्कर्म का केस

By Outcome.c :14-03-2019 08:18


भोपाल। कोहेफिजा पुलिस ने एक महिला की शिकायत पर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष मोहम्मद सगीर के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज किया है। इसमें मो. सगीर के दोस्त बासित नाई को सहअभियुक्त बनाया गया है। पीड़िता का आरोप है कि एमपी नगर इलाके में झुग्गी बनवाने का झांसा देकर उसके साथ दो बार दुष्कर्म किया गया। साथ ही घटना के बारे में किसी को बताने पर महिला को जान से मारने की धमकी दी और उसके पति को झूठे केस में फंसा देने की बात कही थी। इस मामले में अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

कोहेफिजा पुलिस के मुताबिक ऐशबाग इलाके में रहने वाली 35 वर्षीय महिला ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। उसमें बताया था कि उसकी अर्जुन नगर में झुग्गी है। उसमें वह पक्का निर्माण करना चाह रही थी। इसके सिलसिले में वह वर्ष 2016 में क्षेत्र के पार्षद मो. सगीर से मिली थी। तब सगीर ने पक्की झुग्गी बनवाने का भरोसा दिलाया था। इस मामले में बात करने के लिए 1 अप्रैल 2016 को मो. सगीर ने अर्जुन नगर में रहने वाले बासित नाई के माध्यम से उसे मिलने के लिए बुलाया था। बासित उसे अपनी स्कूटर पर बिठा कर मो. सगीर के पास छोड़कर चला गया था। सगीर, उसे अपनी गाड़ी में साथ लेकर वीआईपी रोड स्थित करबला पंप हाऊस ले गया। करबला पंप हाऊस पर सगीर ने महिला को पक्की झुग्गी बनवाने का आश्वासन दिया और पास बने पार्क में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। साथ ही धमकी दी कि घटना के बारे में किसी को कुछ बताया,तो वह जान से मार देगा। साथ ही उसके पति को झूठे केस में फंसवा देगा। डर के कारण महिला घटना के बाद खामोश हो गई थी। इसके बाद फरवरी 2019 को मो. सगीर ने बासित नाई को भेजकर महिला को फिर बुलाया और उसके साथ ज्यादती की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपित मो. सगीर और बासित नाई के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस पर दबाव में समझौता कराने का लगाया था आरोप

गौरतलब है कि पीड़िता ने फरवरी 2019 में सगीर के खिलाफ लिखित शिकायत एमपी नगर थाने में की थी। पुलिस ने शिकायत की जांच शुरू की थी, तभी दूसरे ही दिन कथित रूप से महिला द्वारा शिकायत वापस लेने की बात सामने आ गई थी। लेकिन कुछ दिन बाद महिला ने कलेक्टर की जनसुनवाई में आरोप लगाया था कि पुलिस ने उससे जबरन कोरे कागज पर दस्तखत कराकर खुद समझौते की बात लिख दी थी। साथ ही आरोपितों से जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग भी की थी। कलेक्टर ने मामला पुलिस के पास जांच के लिए भेज दिया था।

Source:Agency

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