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ट्रांसजेंडर बनीं अधिकारी: बोली- घर-घर बधाइयां देकर कमाना मुझे पसंद नही

By Outcome.c :12-03-2019 08:01


भोपाल। समाज में आज अपनी पहचान और जगह तो मिल गई, लेकिन अपने परिवार को छोड़कर काफी संघर्षों के बाद सबकुछ पाया। 15 साल की उम्र के बाद मुझे अपने माता-पिता और अपने परिवार से अलग होना पड़ा। दसवीं के बाद परिवार छोड़ ट्रांसजेंडर की कम्युनिटी को ज्वॉइन करना पड़ा। जहां पर मुझसे घर-घर जाकर त्यौहारों या बच्चों के जन्म पर बधाइयां देकर कमाने के लिए दबाव डाला जाता था, लेकिन मुझे बधाइयां देकर कमाना पसंद नहीं था। यह कहना है सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग में निज सचिव के पद पर नियुक्त ट्रांसजेंडर संजना सिंह राजपूत का।

संजना कहती हैं कि जब बधाइयां देने के लिए मना किया तो मेरी कम्युनिटी ने मेरा साथ छोड़ दिया, लेकिन आज सफल होने के बाद परिवार व समाज सभी साथ हो गए। वे मध्यप्रदेश की जिला सेवा विधिक प्राधिकरण में पहली ट्रांसजेंडर पैरालीगल वॉलेंटियर भी हैं। साथ ही उन्हें लोक अदालत में खंडपीठ का भी सदस्य बनाया गया। इस बार लोक आदलत में खंडपीठ की सदस्य के रूप में जज के साथ बैठकर प्रकरणों की सुनवाई भी की। 36 वर्ष की संजना 2008 से एनजीओ से जुड़कर समाजसेवा करने लगीं। उन्होंने बच्चों व महिलाओं के स्वास्थ्य पर काम किया।

ट्रांसजेंडर को समाज नहीं अपनाता

संजना कहती हैं कि आज भी देश में ट्रांसजेंडर होना एक अभिशाप के समान है और समाज इन्हें अपनाने से कतराता है। ट्रासंजेंडरों को मुख्यधारा में लाने के लिए उन्हें शिक्षा, नौकरी और व्यवसाय के अवसर उपलब्ध कराने होंगे। दुख के क्षण तब सबसे ज्यादा होते हैं, जब बच्चों को परिवार छोड़कर ट्रांसजेंडर समुदाय में आना पड़ता है। मेरे माता-पिता दसवीं कक्षा तक दूसरों से इस बात को छुपाकर अन्य भाई-बहन के साथ मुझे स्कूल में पढ़ने के लिए भेजते थे, लेकिन बाद में सभी को पता चल गया और मजबूरन मुझे अपनी कम्युनिटी में शामिल होना पड़ा।

ट्रांसजेंडर्स को मुख्यधारा से जोड़ने का सपना

संजना का सपना है कि अपनी कम्युनिटी के लोगों को इतना जागरूक कर सकूं कि वे मुख्यधारा से जुड़कर अपनी अलग पहचान बना सके। इसके लिए उन्हें शिक्षा व रोजगार से जुड़ना होगा। अभी वर्तमान में वे इग्नू से ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही हैं।

मध्यप्रदेश से स्वच्छता की ब्रांड एम्बेसडर भी बनीं

संजना 2016 में स्वच्छता अभियान से जुड़ी। उन्होंने समाज के साथ मिलकर मप्र के 15 ग्राम पंचायतों में से 7 ग्राम पंचायत को खुले में शौचमुक्त कराने में अहम भूमिका निभाई। इस विषय पर डाक्यूमेंट्री फिल्म बनी और एक

बुक भी लांच हुई। इसके बाद 2016 में उन्हें मप्र में स्वच्छता की ब्रांड एम्बेसडर के लिए चुना गया। उन्हें अभिनेता अमिताभ बच्चन के हाथों पुरस्कार भी मिला।

Source:Agency

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