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पाकिस्तान के मीडिया से पश्तून आंदोलन ग़ायब, कश्मीर पर हो रही बात

By Outcome.c :08-02-2019 08:15


पाकिस्तान में कुछ प्रदर्शन अख़बारों की सुर्खियों में जगह पाते हैं और कुछ नहीं, ऐसा क्यों होता है?

बीबीसी संवाददाता एम इलियास ख़ान ने मानवाधिकारों के हनन से जुड़ी एक कहानी की पड़ताल की, जिसे मीडिया बताना नहीं चाहता और अधिकारी उस पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं.

पाकिस्तान का मीडिया अब सरकारी नीतियों के मौलिक विरोधाभास को रिपोर्ट करने के लिए संघर्ष कर रहा है.

इस बार इस्लामाबाद के राष्ट्रीय प्रेस क्लब के बाहर यह ज़्यादा देखने को मिला. यहां सैकड़ों की संख्या में प्रतिबंधित चरमपंथी समूह से जुड़े धार्मिक मदरसों के छात्र प्रदर्शन कर रहे थे.

छात्र यहां कश्मीर दिवस के मौके पर इकट्ठा हुए थे. भारत प्रशासित कश्मीर में सैन्य बलों द्वारा किए जा रहे मानवाधिकारों के हनन को चिह्नित करने के लिए हर साल पाकिस्तान में कश्मीर दिवस मनाया जाता है. इस दिन यहां सरकारी छुट्टी होती है.

लेकिन कश्मीर रैली के दौरान पाकिस्तान की पुलिस उन युवाओं को चिह्नित और गिरफ़्तार करने में व्यस्त थी, जो उसी जगह पर आयोजित होने वाली दूसरी रैलियों के लिए आए थे.

इन युवाओं का संबंध किसी चरमपंथी संगठन से नहीं था. ये दक्षिणपंथी अभियान से जुड़े थे, जो अफ़ग़ानिस्तान सीमा से सटे पश्तून इलाक़ों में पाकिस्तान सेना द्वारा किए जा रहे मानवाधिकारों के हनन के ख़िलाफ़ हल्ला बोलने आए थे.

बीते मंगलवार की शाम तक पुलिस ने पश्तून तहफ़्फ़ुज़ आंदोलन से जुड़े 30 से ज़्यादा कार्यकर्ताओं गिरफ़्तार कर लिया और उन्हें एक ट्रक में भर कर थाने ले गई.

वहां मौजूद मीडिया ने हर एक गिरफ़्तारी को अपने कैमरे में क़ैद किया लेकिन ये तस्वीरें न तो टीवी पर ब्रेक हुईं और न ही अगले दिन अख़बारों की सुर्खियां बनीं.
 

Source:Agency

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