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गाय के गोबर से पाकिस्तान चलाएगा कराची में बसें, लेकिन कैसे?

By Outcome.c :09-01-2019 08:09


वायु प्रदूषण दुनिया के लिए एक बड़ी मुसीबत है। इस समस्या से निपटने के लिए हर देश अपने स्तर पर कार्य कर रहा है। कोई अपने शहरों में विशाल एयर प्यूरीफायर लगा रहा है, तो कुछ इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान ने भी अपने सबसे बढ़े शहर कराची की हवा साफ रखने के लिए एक अहम कदम उठाया है। ‘इंटरनेशनल ग्रीन क्लाइमेट फंड’ की मदद से पाक कराची में शून्य उत्सर्जन वाली ग्रीन बसें चलाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 से 200 बसें बीआरटी (बस रैपिड ट्रांजिट) कॉरिडोर में चलाई जाएंगी।

शुरुआत में चलाई जाएंगी 200 बसें
पाक प्रशासन इन 200 बसों का ईंधन गाय के गोबर से जुटाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कराची में 4 लाख दुधारू भैसें हैं। प्रशासन इनका गोबर जमा कर बायो मि‍थेन गैस बनाएगा और इन्‍हीं का इस्‍तेमाल ईंधन के रूप में बसों में किया जाएगा।

समदंर को भी बचाए प्रदूषण से

सुनने में अनोखा लगने वाला यह प्रोजेक्ट समंदर को भी प्रदूषित होने से भी बचाएगा। क्योंकि हर दिन समंदर में प्रवाहित किया जाने वाला 3,200 टन गोबर और पेशाब इस योजना के काम आ जाएंगे। बता दें, कराची में गोबर साफ करने के लिए फिलहाल हर दिन 50 हजार गैलन पानी खर्च होता है।

4 साल में पूरा होगा यह प्रोजेक्ट
पाक प्रधानमंत्री इमरान खान के क्लाइमेट चेंज सलाहकार मलिक अली असलम का कहना है कि बीआरटी सिस्टम वो पहला ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट है, जिसे ‘ग्रीन क्लाइमेट फंड’ ने स्वीकृती दी है। इस प्रोजेक्ट से पर्यावरण को फायदा होने के साथ-साथ कई आर्थिक लाभ भी मिलेंगे। इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में करीब 4 वर्ष लगेंगे।

3 लाख यात्रियों को मिलेगा फायदा

रिपोर्ट के मुताबिक, बसों का यह खास नेटवर्क रोजाना 3 लाख 20 हजार यात्रियों की खिदमत करेगा। इसकी मदद से पाक 2.6 मिलियन टन कार्बन डायॉक्साइड को रोकेगा, जो 30 वर्षों के बराबर है।

प्रोजेक्ट के लिए मिले 3 अरब से ज्‍यादा
प्रदूषण से निपटने के लिए ‘द ग्रीन क्लाइमेट फंड’ विकासशील देशों की मदद करता है ताकि वे स्वच्छ तरीके से आगे बढ़ें। बता दें, इस संगठन ने कराची प्रोजेक्ट के लिए पाक को 49 मिलियन डॉलर (3 अरब 44 करोड़ रुपये) दिए हैं। हालांकि, इस पूरे प्रोजेक्ट का खर्च 583 मिलियन डॉलर का है।

बाकी शहरों में भी करेंगे शुरू
अगर सब कुछ ठीक रहा, तो यह स्वच्छ परिवहन और स्वच्छ पर्यावरण की राह में एक बड़ा कदम होगा। इसकी सफलता के बाद इस प्रोजेक्ट को लाहौर, मुल्तान, पेशावर और फैसलाबाद जैसे शहरों में भी लागू किया जा सकता है।

Source:Agency

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