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बेनकाब हुई आतंकी साजिश

By Outcome.c :31-12-2018 08:41


कहीं ऐसा तो नहीं कि आतंकी संगठन 'हरकत उल हर्ब-ए-इस्लाम' की मंशा भी प्रयागराज में कुंभ महोत्सव को दहलाने की थी? ऐसा इसलिए संभव कि प्रयागराज में आयोजित कुंभ महोत्सव में देश के अलावा विदेश की जानी-मानी हस्तियां भी आमंत्रित हैं और हो सकता है कि यह माड्यूल उन्हें टारगेट कर भारत में आईएस की पैठ का प्रचारित करना चाहता हो। यहां इस बात की भी पड़ताल होनी चाहिए कि गिरफ्तार हुए आतंकी वाकई में इस्लामिक स्टेट के ही हैं या आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन की कोई नई साजिश और पैंतरेबाजी है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि हिजबुल मुजाहिदीन इस्लामिक स्टेट की आड़  में अपना कोई नया संगठन खड़ा कर रहा हो ताकि उसकी तरफ जांच एजेंसियों का ध्यान न जाए। ध्यान रखना होगा कि हिजबुल मुजाहिदीन और लश्करे तैयबा के बीच प्रभाव में वृद्धि को लेकर प्रतिद्वंद्विता चरम पर है और दोनों ही संगठन अधिक से अधिक आतंकी घटनाओं को अंजाम देकर एक-दूसरे पर बढ़त बनाने की फिराक में हैं। 

यह राहतकारी है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आतंकी संगठन आईएसआईए से प्रेरित मॉड्यूल 'हरकत उल हर्ब ए इस्लाम' के खतरनाक मंसूबे को समय रहते उजागर कर देश को एक बार फिर लहूलुहान होने से बचा लिया अन्यथा जिस सुनियोजित तरीके से 'हरकत उल हर्ब ए इस्लाम' के दहशतगर्दों ने देश को दहलाने और शीर्ष नेताओं को टारगेट पर लेने की साजिश रची थी वह बेहद भयावह थी। उसकी पुष्टि उनके पास से बरामद खतरनाक विस्फोटक सामग्रियों और रॉकेट लांचरों से भलीभांति हो जाता है। यह बेहद खतरनाक है जिन साजिशकर्ताओं की धरपकड़ हुई है उनमें कई उच्च व तकनीकी शिक्षा प्राप्त हैं। ऐसे में यह धारणा स्वत: खारिज हो जाती है कि आतंकी कृत्यों में सिर्फ गरीब व कम पढ़े-लिखे लोग ही संलिप्त हैं। जिन दर्जन भर लोगों की गिरफ्तारी हुई है उनमें सभी मध्यमवर्गीय परिवारों से हैं और वे अच्छी तरह अवगत भी हैं कि वे देश के खिलाफ साजिश के हिस्सेदार हैं। जो सबसे खतरनाक बात है वह यह कि आतंकी संगठनों का प्रभाव अब अशिक्षित और मजहबी उन्मादियों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि वह पढ़े-लिखे युवाओं को भी अपनी ओर आकर्षित करने लगा है।

यह स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने के लिए बेहद खतरनाक है। ध्यान देना होगा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा जिन डेढ़ दर्जन स्थानों मसलन दिल्ली के सीलमपुर-जा$फराबाद, लखनऊ, अमरोहा, मेरठ और हापुड़ में छापेमारी कर संदिग्ध लोगों की गिरफ्तारी की गई है, यह इलाका आतंकियों के लिए पसंदीदा रहा है। खुफिया एजेंसियों की मानें तो विगत वर्षों में उत्तरप्रदेश में आतंकी संगठनों की सक्रियता बढ़ी है। चूंकि उत्तरप्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और आतंकियों के लिए यहां पर आतंकी घटनाओं को अंजाम देना और अपने संगठन का विस्तार करना विशेष महत्व रखता है। चूंकि उत्तरप्रदेश में अयोध्या, काशी और मथुरा में निर्मित प्राचीन मंदिरों का विवाद पहले से ही राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है ऐसे में इंकार नहीं किया जा सकता कि आईएस के माड्यूल 'हरकत उल हर्ब ए इस्लामÓ की कोशिश भटके हुए नौजवानों को जिहाद का पाठ पढ़ाकर अपने मिशन को कामयाब बनाना हो। 

याद होगा अभी गत वर्ष ही उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में इस्लामिक स्टेट के संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह को मार गिराया गया। उसके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक एवं घातक हथियारों की बरामदगी हुई थी। साथ ही यह भी तथ्य सामने आया था कि वह होली से पहले उत्तरप्रदेश में भीषण आतंकी वारदात को अंजाम देना चाहता था। इसी तरह हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी कमरुज्जमा उर्फ  डॉ. हुरैरा की कानपुर से गिरफ्तारी हुई। उसकी मंशा भी गणेशोत्सव के दौरान उत्तरप्रदेश को दहलाने की थी। कहीं ऐसा तो नहीं कि आतंकी संगठन 'हरकत उल हर्ब-ए-इस्लाम' की मंशा भी प्रयागराज में कुंभ महोत्सव को दहलाने की थी? ऐसा इसलिए संभव कि प्रयागराज में आयोजित कुंभ महोत्सव में देश के अलावा विदेश की जानी-मानी हस्तियां भी आमंत्रित हैं और हो सकता है कि यह माड्यूल उन्हें टारगेट कर भारत में आईएस की पैठ का प्रचारित करना चाहता हो।

यहां इस बात की भी पड़ताल होनी चाहिए कि गिरफ्तार हुए आतंकी वाकई में इस्लामिक स्टेट के ही हैं या आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन की कोई नई साजिश और पैंतरेबाजी है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि हिजबुल मुजाहिदीन इस्लामिक स्टेट की आड़  में अपना कोई नया संगठन खड़ा कर रहा हो ताकि उसकी तरफ जांच एजेंसियों का ध्यान न जाए। ध्यान रखना होगा कि हिजबुल मुजाहिदीन और लश्करे तैयबा के बीच प्रभाव में वृद्धि को लेकर प्रतिद्वंद्विता चरम पर है और दोनों ही संगठन अधिक से अधिक आतंकी घटनाओं को अंजाम देकर एक-दूसरे पर बढ़त बनाने की फिराक में हैं। हिजबुल मुजाहिदीन का पूरा जोर भटके हुए नौजवानों को अपने संगठन में शामिल करना है। देखा जा रहा है कि वह इस मिशन को कामयाब बनाने के लिए पूरी ताकत से लगा हुआ है।

याद होगा जनवरी 2018 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का स्कॉलर मुनान वशीर वानी हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ। गत अप्रैल माह में दक्षिण कश्मीर से लापता हुआ सेना का एक जवान भी हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ। हाल ही में असम में तैनात एक आईपीएस अधिकारी का भाई भी इस संगठन का सदस्य बना। उसकी फोटो कश्मीर में वायरल हुई जिसमें वह एके-47 लिए खड़ा है। गौर करें तो कानपुर में गिरफ्तार कमरुज्जमा की भी अप्रैल में एके-47 के साथ एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। जांच एजेंसियों को यह भी ध्यान देना होगा कि गिरफ्तार हुए आतंकियों का संबंध सिमी से तो नहीं है।

ऐसा इसलिए कि आज की तारीख में सिमी का इंडियन मुजाहिदीन में रूपांतरण हो चुका है और उसका संपर्क इस्लामिक स्टेट से है। याद रखना होगा कि गत वर्ष लखनऊ में मुठभेड़ में मारा गया सैफुल्लाह उसी कड़ी का एक हिस्सा था। यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि देश की राजधानी दिल्ली और उत्तरप्रदेश में भारी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए मौजूद हैं। इनमें हूजी, जतातुल मुजाहिदीन बांग्लादेश, द जाग्रत मुस्लिम जनता बांग्लादेश, बांग्लादेश कम्युनिस्ट पार्टी व इस्लामी छात्र शिविर जैसे संगठनों के सदस्य भी शामिल हैं। इन पर निगाहबानी तेज करनी होगी। याद होगा अभी गत वर्ष ही अगस्त माह में यूपी एटीएस ने मुजफ्फरनगर से एक बांग्लादेशी आतंकी को गिरफ्तार किया था जिसका संबंध वहां के आतंकी संगठन 'अन्सारुल्ला बांग्ला टीम' से जुड़ा पाया गया। 

गौरतलब है कि इन बांग्लादेशी घुसपैठियों पर आतंकी संगठन आईएस, लश्करे तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन की पैनी नजर है। यहां ध्यान देना होगा कि इस्लामिक स्टेट भले ही भारत में किसी भीषण वारदात को अंजाम देने में विफल रहा हो लेकिन वह अपनी खतरनाक विचारधारा का जहर केरल से लेकर उत्तरप्रदेश तक फैलाने में कामयाब रहा है। आज से चार वर्ष पहले जब भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस्लामिक स्टेट समर्थक मुंबई के दो युवकों को गिरफ्तार किया तो कहा गया कि वे बहकावे में आकर इस संगठन के प्रति आकर्षित हुए हैं।

लेकिन जब राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने हैदराबाद षड़यंत्र का खुलासा किया तो भान हुआ कि इस्लामिक स्टेट भारत के पढ़े-लिखे युवाओं को तेजी से भ्रमित कर रहा है। गौरतलब है कि उस दौरान युवा इंजीनियर मोहम्मद इब्राहिम याजदानी की गिरफ्तारी हुई जो कि युवाओं को इस्लामिक स्टेट में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहा था। गौर करें तो पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, गुजरात, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश सरीखे राज्यों से दर्जनों इस्लामिक स्टेट के समर्थकों की गिरफ्तारी हुई है।

तेलंगाना पुलिस अरसे से भारत में इस्लामिक स्टेट के आतंकियों पर नजर रखी हुई है। वह समय-समय पर उनसे जुड़ी जानकारी भी देश के अन्य राज्यों से साझा करती है। याद होगा तेलंगाना एटीएस की सूचनाओं के आधार पर ही गत वर्ष रेल विस्फोट के जिम्मेदार आरोपियों को दबोचा जा सका। इसी तरह केरल पुलिस भी इस्लामिक स्टेट के प्रभाव में आने वाले युवाओं पर नजर रखी हुई है। ध्यान देना होगा कि इन दोनों राज्यों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर ही पुलिस मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में पसरे खुरसान मॉड्यूल के आतंकियों तक पहुंच सकी।

खुफिया जानकारी की बदौलत ही गत वर्ष मध्यप्रदेश राज्य से इस्लामिक स्टेट के संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्ताारी हुई जिनपर सेना की जानकारी पाकिस्तान को देने का आरोप था। याद होगा गत वर्ष न्यूयार्क टाइम्स द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट से भी खुलासा हुआ था कि हैदराबाद के इस्लामिक स्टेट से जुड़े समर्थक सीधे सीरिया स्थित आतंकियों से संचालित हो रहे हैं। इस खुलासे में इसलिए दम है कि विगत वर्षों में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने अनेकों बार एयरपोर्ट पर इस्लामिक स्टेट में शामिल होने के लिए जा रहे युवाओं को गिरफ्तार किया है। अभी गत वर्ष ही बेंगलुरु का रहने वाले मेंहदी मसूर के बारे में जानकारी मिली कि वह आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट का समर्थक था और सीरिया जा रहे इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों को बार्डर पार करने की जानकारी को अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करता था।

जांच एजेंसियों की मानें तो देश के विभिन्न हिस्सों में युवा इस्लामिक स्टेट का हिस्सा बन रहे हैं। सिर्फ केरल से ही दो दर्जन से अधिक युवा इस्लामिक स्टेट में शामिल हो चुके हैं। यह तथ्य भी सामने आ चुका है कि भारत के कई इस्लामिक स्टेट समर्थक युवा सीरिया और इराक की जंग में आईएस की तरफ से लड़ते हुए मारे जा चुके हैं। अभी गत वर्ष ही केरल के एक शख्स के मारे जाने के खबर की पुष्टि हुई। अब वक्त आ गया है कि भारत की सुरक्षा व खुफिया एजेंसियां आतंकी गतिविधियों में लिप्त लोगों को, जिनकी मदद से इस्लामिक स्टेट भारत में अपना पांव पसारने की फिराक में है, उनसे सख्ती से निपटे और उनकी कमर तोड़े। ऐसा इसलिए कि आतंक के कैंसर को खत्म करने के लिए उसकी विचारधारा के कीड़े को मारना आवश्यक है।
 

Source:Agency

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