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ओपेक से अलग हो रहा है कतर, जानें इसके मायने

By Outcome.c :04-12-2018 07:43


कतर ने सोमवार को ऐलान किया कि वह 1 जनवरी 2019 को पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) से अलग हो जाएगा। उसने 1961 में ओपेक में शामिल हुआ था और अब 60 वर्ष बाद इससे निकलने जा रहा है। ओपेक दुनिया में कुल 44 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति करता है। इस संगठन की स्थापना ऑइल मार्केट की मॉनिटरिंग करने और कच्चे तेल की दरों एवं इसकी आपूर्ति में स्थिरता कायम रखने के लिए उत्पादन बढ़ाने या घटाने का निर्णय लेने के लिए हुआ। 
क्यों अलग हुआ कतर? 
जून 2017 से ही ओपेक के किंगपिन सऊदी अरब ने तीन अन्य अरब देशों यूएई, बहरीन और मिस्र के साथ मिलकर कतर से अपने व्यापारिक रिश्ते एवं परिवहन संपर्क खत्म कर दिए। इन देशों ने कतर पर आतंकवाद और इलाके के प्रतिस्पर्धी देश ईरान का समर्थन करने का आरोप लगाया है। हालांकि, कतर ने इस आरोप को खारिज कर दिया, लेकिन यह भी कहा कि उसके ओपेक से निकलने का कारण उसका पड़ोसी देशों के साथ जारी तनाव नहीं है। कतर के एनर्जी मिनिस्टर साद अल-काबी ने कहा, 'हम इस संगठन में छोटे प्लेयर हैं और हमें अपने विकास पर ध्यान देना है। इसलिए हम संगठन से अलग हो रहे हैं।' काबी ने कहा, 'कच्चे तेल में हमारे लिए अधिक संभावनाएं नहीं हैं। हम वास्तविकता पर यकीन करते हैं। हमारी संभावनाएं गैस में हैं।' 

ओपेक में कब-कब पड़ी फूट? 
पिछली बार 2016 में इंडोनेशिया ने अपनी सदस्यता वापस ले ली थी क्योंकि वह कुछ वर्ष पहले उसे खुद तेल आयात करने की नौबत आ पड़ी। उससे पहले, इक्वाडोर 1992 में ओपेक से अलग हुआ था। आर्थिक और राजनीतिक संकट के कारण उसकी सदस्यता 2007 तक निलंबित रही थी। इसी तरह, गबोन भी 1995 में ओपेक से अलग हुआ था, लेकिन 2016 में उसने संगठन में वापसी कर ली। 

कतर के निकलने का असर 
हालांकि कतर बड़ा हिस्सेदार न होते भी ओपेक के लिए महत्वपूर्ण है। कतर 6 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) का उत्पादन करता है। वहीं, सऊदी अरब 1 करोड़ 10 लाख bpd का उत्पादन करता है और दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक और निर्यातक है। दोहा LNG के मामले में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। कतर तेल उत्पादन की दृष्टि से ओपेक के 15 देशों की लिस्ट में 11वें नंबर पर आता है। ओपेक देशों ने अक्टूबर 2018 में हर दिन 3 करोड़ 33 लाख 30 हजार बैरल तेल उत्पादन किया था, जिनमें कतर का योगदान प्रति दिन 6 लाख 10 हजार बैरल यानी कुल उत्पादन का महज 1.83 प्रतिशत रहा है। 

ऐन मौके पर ऐलान 
कतर का यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब ओपेक के सदस्य देश इसी सप्ताह 6 दिसंबर को ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में मिलने वाले हैं। इस मीटिंग में ओपके के तेल उत्पादन की मात्रा पर विचार किया जाएगा क्योंकि 5 नवंबर को ईरान पर लगे अमेरिकी पाबंदियों के बाद सऊदी अरब और रूस ने तेल मार्केट में संतुलन कायम रखने के लिए उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। उधर, कतर भी ओपेक से निकलने के बाद तेल उत्पादन बढ़ा सकता है।

भारत पर क्या असर? 
कतर भारत का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यातक देश है। वह अपने कुल एलएनजी उत्पादन का 15 प्रतिशत भारत को निर्यात करता है। इसे दूसरी तरफ से देखें तो भारत कुल 65 प्रतिशत एलएनजी का आयात कतर से करता है। लेकिन, भारत का सऊदी अरब के साथ भी अच्छा संबंध है और सऊदी दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक है। ऐसे में भारत को संतुलित कदम बढ़ाने की जरूरत है। 

Source:Agency

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