Breaking News

अब 50 साल की उम्र में भी मां बनना मुश्किल नहीं

By Outcome.c :18-10-2018 11:08


आज कॅरियर और जिंदगी की भागदौड़ में उलझी महिलाएं परिवार शुरू करने में थोड़ा ज्यादा समय लेती हैं। कई बार उनकी उम्र उस दहलीज पर पहुंच जाती है, बायोलॉजिकली जहां मां बनने में मुश्किल होती है। मगर मेडिकल साइंस ने आज इतनी तरक्की कर ली है कि महिलाओं के अधिक उम्र में मां बनना मुश्किल नहीं है। 50 साल महिलाओं के लिए एक ऐसी उम्र है जब ज्यादातर महिलाओं का मेनॉपॉज शुरू हो जाता है और अंडाशयों द्वारा हार्मोन का उत्पादन बंद हो जाता है। ऐसे में मां बनना नामुमकिन समझा जाता है। मगर साइंस और टेक्नोलॉजी ने इस समस्या का भी हल ढूंढ़ निकाला है। अब 50 की उम्र में मां बनना मुश्किल नहीं रह गया है। 
एक ओर मेडिकल साइंस में तरक्की ने कॅरियर पर ध्यान देने वाली, स्वतंत्र महिलाओं को यह विकल्प दिया है कि वे गर्भावस्था को देरी से प्लान कर सकती हैं। वहीं, दूसरी ओर उन महिलाओं के लिए भी संभावनाएं उत्पन्न की हैं जो बढ़ती उम्र में दूसरा या तीसरा बच्चा चाहती हैं। ऐसी महिलाएं भी हैं जिन्होंने देर से शादी की हो, या जो दूसरी शादी से बच्चा चाहती हैं। कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो दूसरा बच्चा प्लान करने के बारे में सोच रही हैं, लेकिन लंबे ब्रेक के बाद यानी लेट प्रेगनेंसी प्लानिंग। 
बड़ी उम्र में मां बनने पर रिस्क 
दिल्ली के फॉर्टिस लाफेम की ऑब्स्टेट्रिक्स और गाइनोकोलॉजी की सीनियर कंसल्टेंट डॉ कुसुम साहनी का कहना है कि अगर आप 30 साल की उम्र के आसपास बच्चे को जन्म देने की प्लानिंग करती हैं तो प्रेग्नेंसी की संभावना अधिक होती है। हालांकि बड़ी संख्या में महिलाएं अब बड़ी उम्र में भी प्रेग्नेंट हो रही हैं। 40 या 50 साल की उम्र में मां बनना मुश्किल जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं। हालांकि डॉ साहनी कहती हैं कि अधिक उम्र में प्रेग्नेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबीटीज, हाइपरटेंशन, होने वाले बच्चे में डाउन्स सिंड्रोम, समय से पहले डिलिवरी और स्टिल बर्थ जैसे कई रिस्क शामिल होते हैं। अधिक उम्र में 3 तरीकों से कर सकती हैं गर्भधारण। हालांकि इनके अपने-अपने सीमाएं और सफलता की दर है। 
गर्भधारण के 3 तरीके
प्राकृतिक रूप से गर्भधारण 
आईवीएफ तकनीक में खुद के अंडों का इस्तेमाल 
आईवीएफ तकनीक में डोनर की मदद से 
उम्र पर निर्भर करती है फर्टिलिटी 
इसमें कोई शक नहीं कि फर्टिलिटी की क्षमता उम्र पर निर्भर करती है। महिला की उम्र जितनी अधिक होगी उसके प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने की संभावना उतनी ही घट जाएगी। जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती जाती है उसके शरीर में मौजूद स्वस्थ अंडों की संख्या घटती जाती है और यही वजह है कि उसके प्रेग्नेंट होने की संभावना भी कम होती जाती है। 
एक महिला जन्म के समय सभी अंडाणु के साथ पैदा होती है। 30 साल की उम्र पार कर चुकी महिलाओं में स्वस्थ अंडाणुओं की संभावनाएं कम होती हैं। इससे उनके गर्भवती होने की संभवाना भी कम हो जाती है। इसलिए, विसंगतियों वाले बच्चे होने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। आंकड़ों की बात करें तो 20 की उम्र के दौर में जेनेटिक डिसऑर्डर के साथ पैदा होने वाले बच्चों की संभावना 2500 में एक होती है, जबकि 40 की उम्र में यह संभावना 350 में एक हो जाती है।
डोनर की मदद से 
50 साल की उम्र में ज्यादातर महिलाओं की रजानिवृत्ति शुरू हो जाती है। ऐसे में उनका मां बनना लगभग असंभव हो जाता है। वह अपने ही अंडों से गर्भधारण करने की कोशिश करने के बजाय किसी डोनर की सहायता से आईवीएफ तकनीक का इस्तेमाल कर सकती हैं। सबसे अहम बात यह है कि महिला को पूरी तरह से स्वस्थ होना चाहिए ताकि प्रेग्नेंसी से जुड़े रिस्क को कम किया जा सके और स्वस्थ बच्चे का जन्म हो सके। 
अपने अंडाणु का इस्तेमाल कर के
गुरुग्राम स्थित कोलंबिया एशिया अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्री रोग कंसल्टेंट डॉ. रितु सेठी ने बताया कि, अपने अंडाणु से गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए अंडाशय से प्राप्त परिपक्व अंडे के उर्वरता की जटिल प्रक्रिया है। इनफार्टिलिटी कई कारकों जैसे फेलोपियन ट्यूब में क्षति या अवरोध होना, एंडोमीट्रिओसिस, शुक्राणु गतिशीलता में कमी आना और ओवुलेशन में गड़बड़ी की वजह से हो सकती है। ओवरी से अण्डे के बाहर आने की क्रिया को ओवुलेशन कहते हैं। बढ़ती उम्र में अपने अंडे का उपयोग कर गर्भ धारण करने का सफलता दर काफी कम है। हालांकि, अगर किसी ने कम उम्र में एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया कर ली है, तो उन्हें फर्टाइल करने के लिए क्लीनिकों की सहमति की संभावना अधिक होती हैं।

Source:Agency

Rashifal