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रिसर्च ने बताया अगरबत्‍ती के धुएं को सिगरेट से ज्‍यादा खतरनाक

By Outcome.c :17-10-2018 10:55


पूजा के दौरान घर की शुद्ध‍ि और ईष्‍ट को प्रसन्‍न करने के मकसद में हम अक्‍सर अगरबत्‍ती जलाते हैं। लेकिन कुछ समय पहले हुए अध्ययन के मुताबिक अगरबत्ती के धुएं में शामिल केमिकल आपके डीएनए तक को बदल सकते हैं। चीन में हुए इस अध्ययन में दावा किया गया है कि घरों में जलाई जाने वाली अगरबत्ती के धुएं में कई हानिकारक तत्व मौजूद होते हैं जो हमारे डीएनए तक में बदलाव ला सकते हैं। यह म्यूटेशंस की वजह भी बन सकता है और इससे कई समस्‍याएं हो सकती हैं। 
इस शोध में दावा क‍िया गया है क‍ि सिगरेट और अगरबत्ती के धुएं से होने वाले नुकसान के बारे में तुलनात्मक अध्ययन हुआ। अगरबत्‍ती जलाने के बाद जिस धुएं को हम सांस के साथ शरीर में ले जाते हैं, उससे सांस संबंधी गंभीर बीमार‍ियां हो सकती हैं। शोध में बताया गया है कि इस धुएं में 64 के करीब कंपाउंड होते हैं जो सांस की नली को रोक सकते हैं। 
शोध में कहा गया है क‍ि अगरबत्ती के धुएं के सैंपल में पाया गया कि इसमें 99 फीसदी अल्ट्राफाइन और फाइन पार्टिकल्स होते हैं। शरीर में जाने पर यह बुरा असर करते हैं। इससे सिगरेट के धुएं की तुलना में जिंदा सेल्स को ज्यादा नुकसान होता है और कैंसर की वजह बनता है। 
आपको बता दें कि एशियाई देशों में घरों के भीतर और मंदिरों में अगरबत्ती और धूप जलाना काफी प्रचलित है। इसी को लेकर हुई रिसर्च में बताया गया क‍ि इसके जलने के दौरान पार्टिकल मैटर हवा में घुलते हैं। ये सांस लेने के दौरान हवा के साथ आपके फेफड़ों तक पहुंचते हैं और वहीं फंस जाते हैं। इसका असर काफी खराब होता है। वहीं खुशबू के लिए प्रयुक्‍त होने वाले केमिकल खतरा और भी बढ़ाते हैं। 
हालांकि ऑल इंड‍िया अगरबत्‍ती मैन्‍युफैक्‍चर्स के प्रेजिडेंट सरथ बाबू का कहना है कि इस स्‍टडी को साबित करने के लिए कोई वैज्ञान‍िक आधार नहीं है। इस स्‍टडी को चीन की एक कंपनी ने किया है और कोई और रिसर्च इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं कर पाई है, लिहाजा इसे थ्‍योरी नहीं माना जा सकता। सरथ बाबू का ये भी कहना है कि सिगरेट के नुकसान कई रिसर्च में साबित हो चुके हैं। 
साथ ही सरथ बाबू ने ये भी कहा कि सिगरेट और अगरबत्‍ती की कोई तुलना भी नहीं की जा सकती है क्‍योंकि अगरबत्‍ती या धूप दिन में एक या दो बार ही जलाई जाती हैं, जबकि सिगरेट का धुआं द‍िन में कि‍सी भी समय प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष तरीके से फेफड़ों में जाता है। 
 

Source:Agency

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