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ब्रिटेन: 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' से जुड़ी फाइलें होगी सार्वजनिक

By Outcome.c :13-06-2018 08:03


इस्लामाबादः भष्ट्राचार के विभिन्न मामलों  में घिरे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को एक और झटका लगा है। आम चुनावों से ठीक पहले एनएबी (नैशनल अकांउटेबिलिटी ब्यूरो) द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नवाज शरीफ के वकील ख्वाजा हैरिस ने  उनके केस को लड़ने से इंकार कर दिया है । सोमवार को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने  आदेश दिया था कि इस मामले की सुनवाई शनिवार सहित सप्ताह के प्रत्येक दिन होगी. इसके बाद शरीफ के वकील इस केस से हट गए। 

 न्यूज वेबसाइट डॉन के मुताबिक केस को जानबूझकर लंबा खींचने से परेशान  नवाज शरीफ ने  कहा कि  चीफ जस्टिस इस केस की सुनवाई अपनी ही बेंच में कर सकते हैं और मुझे फांसी की सजा या जेल भेज सकते हैं।  उन्होंने कहा कि वह कम से कम 100 बार कोर्ट में पेश हो चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग के नेता ने प्रैस कॉन्फ्रैंस के जरिए आपत्ति दर्ज कराई।  उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थिति में कोई भी वकील इस केस को नहीं लेगा, क्योंकि उसे केस की तैयारी करने का समय नहीं मिलेगा। केस की सुनवाई वीकेंड पर भी हो रही है।

जब केस के जज मोहम्मद बशीर ने कोर्ट में सुनवाई शुरु की, तब शरीफ ने जज से कहा, 'मेरे वकील ने केस से खुद को हटा लिया है।मेरा मूलभूत अधिकार है कि मैं अपनी पसंद के हिसाब से एक नया वकील हायर करूं।' शरीफ ने आगे कहा कि अब तक ख्वाजा हैरिस केस को अच्छी तरह से समझते थे, अब इस स्थिति में एक नए वकील को नियुक्त करना आसान काम नहीं है।शरीफ के बयान के बाद कोर्ट के जज बशीर ने कहा कि ख्वाजा का लिखित आदेश दिया जाए। वकील ख्वाजा को फिर से केस से जुड़ने के लिए मनाया जाए, यदि वो ना मानें तो आप 19 जून तक एक नए वकील को हायर कर सकते हैं।
लंदन: ब्रिटेन के एक न्यायाधीश ने 1984 के ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का आदेश दिया है, ताकि इस घटना में ब्रिटिश सरकार की भागीदारी और साफ तौर पर जाहिर हो सके. साथ ही अदालत ने ब्रिटिश सरकार की यह दलील खारिज कर दी कि इस कदम के चलते भारत के साथ राजनयिक संबंधों को नुकसान पहुंचेगा. लंदन में मार्च में फर्स्ट टियर ट्रिब्यूनल (सूचना अधिकार) की तीन दिवसीय सुनवाई की अध्यक्षता करने वाले न्यायाधीश मुरी शैक्स ने सोमवार(11 जून) को कहा कि उस समय की ज्यादातर फाइलें अवश्य ही सार्वजनिक की जानी चाहिए.

उन्होंने ब्रिटिश सरकार की यह दलील खारिज कर दी कि डाऊनिंग स्ट्रीट के कागजात को सार्वजनिक करने से भारत के साथ राजनयिक संबंधों को नुकसान पहुंचेगा. हालांकि, न्यायाधीश ने स्वीकार किया कि ब्रिटेन की संयुक्त खुफिया समिति के पास मौजूद ‘इंडिया: पॉलीटिकल ’ नाम की एक फाइल में कुछ ऐसी सूचना हो सकती है जो ब्रिटिश जासूसी एजेंसी- एमआई 5 एमआई 6 और सरकार संचार मुख्यालय से जुड़ी हो. न्यायाधीश के आदेश में कहा गया है, ‘‘ हम जिस अवधि की बात कर रहे हैं वह भारत के हालिया इतिहास में एक बहुत ही संवेदशील समय का है.

साल 2014 में ब्रिटेन की सरकार ने कुछ दस्तावेज सार्वजनिक किए थे 
यह भी याद रखना चाहिए कि 30 साल गुजर गए हैं.’’ दरअसल, नियमों के मुताबिक इस तरह की फाइलों को वहां 30 साल के बाद ही सार्वजनिक किया जा सकता है. साल 2014 में ब्रिटेन की सरकार ने कुछ दस्तावेज सार्वजनिक किए थे जिससे इस बात का खुलासा हुआ था कि ब्रिटिश सेना ने ऑपरेशन ब्लू स्टार से पहले भारत की सेना को सलाह दी थी.


बहरहाल, यूके कैबिनेट कार्यालय को फर्स्ट टियर ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ अपील के लिए 11 जुलाई तक का वक्त दिया गया है. उसे संबद्ध दस्तावेज अध्ययन के लिए 12 जुलाई तक स्वतंत्र पत्रकार फिल मिलर को उपलब्ध कराने होंगे. मिलर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में किए गए ऑपरेशन में मार्गरेट थैचर नीत तत्कालीन सरकार द्वारा थल सेना (भारतीय) को दी गई सहायता की प्रकृति की जांच कर रहे हैं. 
 

Source:Agency

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