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'आसियान' देशों के साथ भारत के संबंध

By Outcome.c :08-06-2018 08:48


डॉक्टर महातिर मोहम्मद के प्रधानमंत्री बनने से मलेशिया में भारतीय मूल के लोगों में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई है और वहां रहने वाले भारतीय मूल के लोगों का आग्रह था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार मलेशिया आकर डॉक्टर महातिर मोहम्मद से अवश्य मिलें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनकी इच्छा पूरी की और मलेशिया जाकर नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद से मिले। दोनों नेताओं के बीच सौहार्द्रपूर्ण वार्ता हुई और भारत ने मलेशिया को यह आश्वासन दिया कि पुरानी बातों को भूलकर अब भारत नये सिरे से मलेशिया का साथ देगा और एशियाई देशों में खासकर 'आसियान' के सदस्य देशों से भारत निकटतम संबंध बनाएगा जिससे चीन या कोई दूसरे देश मलेशिया को आंख नहीं दिखा सकेंगे। 

एशियाई देशों में चीन के बढ़ते हुए प्रभुत्व को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के पड़ोसी देशों के साथ 'एक्ट ईस्टÓ नीति को अपनाया और इस नीति पर वे जोर-शोर से कार्यरत हैं। इसी नीति के तहत उन्होंने हाल-हाल में 'आसियानÓ के प्रमुख तीन देशों की यात्रा की जो इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर हैं। पिछले अनेक वर्षों से भारत इन पड़ोसी देशों की अनदेखी करता आ रहा था जिसका पूरा फायदा चीन ने उठाया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन देशों का दौरा करके उनके साथ भारत के संबंधों को नये सिरे से मजबूत किया। 

इंडोनेशिया के साथ भारत के संबंध बहुत पुराने हैं। इतिहासकारों का कहना है कि 9वीं शताब्दी में सैकड़ों बौद्ध और हिन्दू भिक्षु बड़ी-बड़ी नावों में सवार होकर सुदूर पूर्व के देश इंडोनेशिया चले गये और वहां की मनोरम छवि को देखकर वहीं बस गये। कालान्तर में उन्होंने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया। आज की तारीख में इंडोनेशिया में सबसे अधिक मुसलमान हैं। परन्तु आश्चर्य की बात है कि वे अभी भी रामायण का मंचन करते हैं जिसे वहां के लोग अत्यन्त ही चाव से देखते रहते हैं। मुस्लिम आबादी के इस देश में रामायण का जो मंचन होता है वह विदेशों में भी दिखाया जाता है। इंडोनेशिया में महाभारत काल के भी कई प्रतीक आज भी विद्यमान हैं जो पर्यटकों के लिये अत्यन्त की कौतूहल के विषय हैं।

इंडोनेशिया में हिन्दू और बौद्ध कई प्रसिद्ध मंदिर हैं जो भारतीय इंडोनेशिया जाते हैं वे इन मंदिरों का दर्शन अवश्य करते हैं। इंडोनेशिया से भारत के व्यापारिक संबंध भी बहुत मजबूत हैं। वहां से प्रतिवर्ष पाम ऑयल और कोयला भारी मात्रा में भारत आता है और भारत से अनेकों उपभोक्ता वस्तुएं इंडोनेशिया निर्यात की जाती हैं।  इंडोनेशिया के राष्ट्रपति से मिलकर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि भारत नये सिरे से इंडोनेशिया के साथ अपने संबंधों को मजबूत करेगा। दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों की यह एक महत्वपूर्ण कड़ी है। 
इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मलेशिया गये जहां उन्होंने 92 वर्षीय नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद से मुलाकात की। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने एक-दूसरे को भरोसा दिलाया कि अब उनके संबंध पहले से अधिक मधुर होंगे। 

मलेशिया में तीन तरह के लोग बसते हैं। पहली श्रेणी में वहां के मूल निवासी हैं जिन्हें 'भूमिपुत्र' कहा जाता है और दूसरी श्रेणी में अल्पसंख्यक चीनी और भारतीय मूल के लोग हैं। पिछले कई वर्षों में मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री अब्दुल रज्जाक के उकसावे पर 'भूमिपुत्रों' ने भारतीय मूल के लोगों को बहुत तंग किया। अनेक बार खूनी संघर्ष भी हुए हजारों भारतीय मूल के लोग वहां से निकल कर चले गये। कुछ लोग अमेरिका जाकर बस गये और कुछ भारत में आकर अपना व्यवसाय करने लगे। डॉक्टर महातिर मोहम्मद एक धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति हैं और अनेक वर्षों तक मलेशिया के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने कई बार अब्दुल रज्जाक को यह चेतावनी दी कि उन्हें धर्मनिरपेक्ष रहना चाहिये और भूमिपुत्रों को भड़का कर भारतीय और चीनी मूल के लोगों को तंग नहीं करना चाहिये।

परन्तु रज्जाक के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। अंत में लाचार होकर लोगों के आह्वान पर 92 वर्षीय डॉक्टर महातिर मोहम्मद ने नई पार्टी बनाकर रज्जाक की पार्टी को धूल चटा दी और वे फिर से देश के प्रधानमंत्री बन गये। डॉक्टर महातिर मोहम्मद के प्रधानमंत्री बनने से मलेशिया में भारतीय मूल के लोगों में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई है और वहां रहने वाले भारतीय मूल के लोगों का आग्रह था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार मलेशिया आकर डॉक्टर महातिर मोहम्मद से अवश्य मिलें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनकी इच्छा पूरी की और मलेशिया जाकर नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद से मिले। दोनों नेताओं के बीच सौहार्द्रपूर्ण वार्ता हुई और भारत ने मलेशिया को यह आश्वासन दिया कि पुरानी बातों को भूलकर अब भारत नये सिरे से मलेशिया का साथ देगा और एशियाई देशों में खासकर 'आसियान' के सदस्य देशों से भारत निकटतम संबंध बनाएगा जिससे चीन या कोई दूसरे देश मलेशिया को आंख नहीं दिखा सकेंगे। 

गत आम चुनाव में इस बात की बड़ी चर्चा होने लगी थी कि पूर्व प्रधानमंत्री रज्जाक ने भ्रष्ट तरीके से अरबों डालर अपने खाते में डाल लिये थे। अमेरिका को एक प्रसिद्ध दैनिक अखबार ने इसका खुलासा किया था। इस पर रज्जाक ने कहा था कि अरब देश के एक धनी राजकुमार ने यह पैसा उन्हें दान में दिया था जिसके जवाब में महातिर मोहम्मद ने कहा था कि वे तो वर्षों तक मलेशिया के प्रधानमंत्री रहे। किसी ने एक डालर भी उनके खाते में नहीं डाला। स्पष्ट है कि भ्रष्ट तरीके से रज्जाक ने वह धन अर्जित किया है। चुनाव के बाद जब महातिर मोहम्मद देश के प्रधानमंत्री बने तब एक प्राइवेट कंपनी के जेट हवाई जहाज से रज्जाक ने देश से भागने की कोशिश की। महातिर मोहम्मद की खुफिया एजेंसी ने उन्हें इस बात की सूचना दे दी। उन्होंने सभी हवाई कंपनियों को यह हिदायत दे दी कि वे रज्जाक को देश से भागने में मदद नहीं करें। रज्जाक को यह डर था कि नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद उन पर मुकदमा चलाकर उन्हें जेल में डाल देंगे। लगता है कि अब ऐसा ही होगा और रज्जाक की भ्रष्ट करतूतों से पर्दा हटाया जाएगा और उनके द्वारा अर्जित काला धन नई सरकार जब्त कर लेगी। 

प्रधानमंत्री की सबसे महत्वपूर्ण यात्रा सिंगापुर की रही। सिंगापुर ही पिछले वर्षों में भारत को 'आसियान' के निकट लाया था। नरेन्द्र मोदी के सिंगापुर दौरे से यह संबंध और भी घनिष्ठ हो गया। सिंगापुर में अभी भी भारतीय मूल के लोग ऊंचे पदों पर हैं। कई तो वहां के महत्वपूर्ण मंत्री भी बने हैं। अंग्रेज बड़े उद्यमी थे। उन्होंने 'मलय' देश के जंगलों में खोजकर यह पाया था कि वहां व्यापक पैमाने पर रबड़ की खेती हो सकती है और इसलिये उन्होंने जहाजों में भरकर दक्षिण भारत के श्रमिकों को सिंगापुर और मलेशिया भेज दिया था। पहले तो ये दोनों देश इक_े थे। बाद में मलेशिया का यह दुर्भाग्य था कि वह सिंगापुर से अलग हो गया। आज पूर्वी एशिया में सिंगापुर सबसे संपन्न देश बन गया है। सिंगापुर में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए नरेन्द्र मोदी ने कहा कि सिंगापुर के साथ भारत के संबंध गर्मजोशी से भरे हैं। जब भारत ने अपने दरवाजे दुनिया के लिए खोले और पूर्व का रुख किया तो सिंगापुर भारत और आसियान के बीच एक पुल बन गया। उन्होंने कहा कि दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक स्वर में बोलते हैं और दोनों देश समय के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। भविष्य में ये संबंध और मजबूत होंगे। सिंगापुर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वहां के सबसे प्राचीन और भव्य मंदिर 'श्री मारिमन मंदिर' में भगवान के दर्शन किये। वे बौद्ध मंदिरों में भी गये और 'चाइना टाउन' की प्रसिद्ध मस्जिदों में भी गये।

कुल मिलाकर नरेन्द्र मोदी का 'आसियान' देशों का दौरा हर दृष्टिकोण से सफल रहा। उन्होंने सिंगापुर निवासियों को यह विश्वास दिलाया कि भारत एक उभरता हुआ मजबूत राष्ट्र है और सुरक्षा तथा आर्थिक मामलों में पहले की तरह ही उनके साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने परोक्ष रूप से सिंगापुर के निवासियों को यह भरोसा दिलाया कि उन्हें चीन से डरने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि उनका मित्र देश भारत उनके साथ एक मजबूत चट्टान की तरह खड़ा रहेगा।

Source:Agency

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