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बिना पर्यावरण स्वीकृति के बिल्डरों ने शुरू किए 58 हाउसिंग प्रोजेक्ट

By Outcome.c :16-05-2018 07:14


भोपाल। भोपाल और इंदौर में बिल्डरों की मनमानी सामने आई है। बिल्डरों ने पर्यावरण स्वीकृति के बिना ही हाउसिंग प्रोजेक्ट का काम शुरू कर दिया है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय (एफओईएफ) ने ऐसे 58 प्रोजेक्ट चि-ति किए हैं। इनमें से 30 भोपाल और 28 इंदौर के हैं। इनमें ज्यादातर हाउसिंग के ही हैं। बीते चार-पांच साल से इनका निर्माण कार्य चल रहा है। कुछ तो पूरे हो चुके हैं। इन प्रोजेक्टों से पर्यावरण को खतरा पैदा होने का अनुमान है। अब स्टेट एनवायरमेंट इंपेक्ट असेसमेंट ऍथारिटी (सिया) इन प्रोजेक्टों का ऑडिट कराएगी। पर्यावरण को क्षति होने की पुष्टि होने पर जुर्माना लगेगा।

हाउसिंग और उद्योगों से जुड़े प्रोजेक्टों के निर्माण से पहले सिया से पर्यावरण स्वीकृति लेनी पड़ती है। यानी सिया के एक्सपर्ट प्रस्तावित प्रोजेक्टों में इस बात की जांच करते हैं कि इनके शुरू होने से पर्यावरण को किसी तरह का खतरा तो नहीं होगा और यदि होगा तो उसकी भरपाई किस तरह की जाएगी। इसके बाद ही इन प्रोजेक्टों को पर्यावरण स्वीकृति दी जाती है। इसके बाद काम शुरू किए जाते हैं। इन 58 प्रोजेक्टों में ऐसा नहीं हुआ। बिल्डरों ने स्थानीय निकायों से कुछ अनुमतियां लेकर काम शुरू कर दिया, लेकिन सिया से पर्यावरण स्वीकृति नहीं ली।

ऐसे पकड़ में आए प्रोजेक्ट

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय (एमओईएफ) ने मार्च 2017 में एक गाइड लाइन जारी की। इसमें कहा कि जो प्रोजेक्ट बिना पर्यावरण स्वीकृति के चल रहे हैं वे निर्धारित प्रारूप में आवेदन करें। जांच के बाद उन्हें स्वीकृति दी जाएगी। इसके बाद एमओईएफ को प्रदेश से 58 प्रोजेक्ट के आवेदन मिले। लेकिन एफओईएफ ने इन्हें स्वीकृति नहीं दी। बल्कि सभी 58 मामलों को मार्च 2018 में प्रदेश सिया कमेटी को भेज दिए।

अब ये होगा

अब सिया कमेटी इन प्रोजेक्टों का स्टेट लेवल एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी (सिएक) से ऑडिट कराएगी। यानी एक्सपर्ट देखेंगे कि जो निर्माण हुआ है उसमें किस तरह पर्यावरण को क्षति पहुंची। रिपोर्ट सिया को दी जाएगी। सिया जुर्माना तो लगाएगी साथ ही पर्यावरण के लिए जरूरी कामों को पूरा कराएगी। इसके बाद स्वीकृति देने की कार्रवाई होगी।

सिया से इसलिए लेनी होती है अनुमति

किसी भी तरह के प्रोजेक्ट के निर्माण से पर्यावरण को खतरा होता है। जैसे हाउसिंग व औद्योगिक प्रोजेक्ट के लिए पेड़ कटते हैं, पूर्ण होने के बाद दूषित जल, कचरा आदि निकलता है। इनका वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन न होने की स्थिति में पर्यावरण को नुकसान होता है। इन सभी बिंदुओं पर सिया के एक्सपर्ट बारिकी से काम करते हैं और नुकसान की भरपाई की योजना के तहत अनुमति दी जाती है। साथ ही ऐसे प्रोजेक्टों की देखरेख भी की जाती है।

कार्रवाई करेंगे

प्रोजेक्ट के मालिकों को नोटिस दिए जा रहे हैं। सिएक से ऑडिट भी कराएंगे। कमियां मिलने पर जुर्माने की कार्रवाई करेंगे। प्रोजेक्टों में पर्यावरण संबंधी जो कमियां होगी, उन्हें पूरा कराएंगे - राकेश श्रीवास्तव, चेयरमैन सिया मप्र

Source:Agency

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