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केएसएस पेट्रोन का बकाया चुकाएं मित्तल

By Outcome.c :07-02-2018 07:38


भारतीय स्टेट बैंक की अगुआई में घरेलू कर्जदाताओं ने केएसएस पेट्रोन प्रा. लि. द्वारा कर्ज भुगतान में चूक के बाद आर्सेलरमित्तल के प्रवर्तक अरबपति उद्योगपति एलएन मित्तल से 13.40 अरब रुपये के कर्ज का भुगतान करने को कहा है। कजाखस्तान की तेल बुनियादी ढांचा प्रदाता कजास्टोरी सर्विसेज (केएसएस) कंपनी में मित्तल की 33 फीसदी हिस्सेदारी है। केएसएस की केएसएस पेट्रोन में 100 फीसदी हिस्सेदारी है। केएसएस पेट्रोन 2015 से ही गैर-निष्पादित आस्तियों में तब्दील हो गई है। bshindi.com

कर्जदाताओं ने कहा कि अगर आर्सेलरमित्तल भारत में फंसी संपत्तियों के लिए बोली लगाना चाहती है तो मित्तल को केएसएस में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचनी होगी या केएसएस पेट्रोन का कर्ज चुकाना होगा। इसकी वेबसाइट पर आईबीसी नोटिस के मुताबिक केएसएस पेट्रोन ने निजी क्षेत्र के बैंकों का कर्ज चुकाने में भी डिफॉल्ट किया है। bshindi.com

इस बारे में संपर्क करने पर आर्सेलरमित्तल के प्रवक्ता ने कहा कि ऐसा कोई कानूनी आधार नहीं है जो आर्सेलरमित्तल को नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा लेने से रोक सके। उन्होंने कहा, 'आर्सेलरमित्तल का पेट्रोन से कोई संबंध नहीं है और इस प्रक्रिया में कंपनी की कोई भूमिका भी नहीं है। आर्सेलरमित्तल की वित्तीय स्थिति काफी सुदृढ़ है।' अपना बकाया पैसा वापस लेने के प्रयास के तहत एसबीआई की नई दिल्ली स्थित परिसंपत्ति प्रबंधन शाखा ने मित्तल को पत्र लिखकर खाते को नियमित करने को कहा है।

लेकिन कर्जदाताओं का कहना है कि कई बार इसका सूचना देने के बाद भी मित्तल की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। बैंकों ने अगस्त 2017 को इस कंपनी को ऋणशोधन एवं दिवालिया संहिता 2016 के तहत राष्ट्रीय लॉ ट्रिब्यूनल में भेजने का निर्णय किया था। हालांकि कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक की उस सूची में शामिल नहीं थी जिसे ऋणशोधन के लिए छांटा गया था। मित्तल ने 2011 में केएसएस में 30 करोड़ डॉलर में 33 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। यह कजाखस्तान की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण कंपनी है। भारत में केएसएस पेट्रोन जुलाई 2007 से ही पाइपलाइन बिछाने की परियोजनाओं आदि का परिचालन कर रही है। bshindi.com

बैंकों द्वारा सीधे मित्तल को कर्ज भुगतान के लिए लिखा है। इससे स्टील क्षेत्र की फंसी संपत्तियों में निवेश करने की मित्तल की योजना प्रभावित हो सकती है। पिछले साल अप्रैल में रेटिंग फर्म क्रिसिल ने बैंकों को चेताया था कि केएसएस पेट्रोन कई बार कहने के बावजूद वित्तीय सूचनाएं साझा नहीं कर रही है।

हाल ही में एलएन मित्तल के नियंत्रण वाली आर्सेलरमित्तल ने उत्तम गैल्वा में 29 फीसदी हिस्सेदारी इसके सह-प्रवर्तकों को बेचने का निर्णय किया है। शेयरों का हस्तांतरण 1 रुपये प्रति शेयर के भाव पर किया जाएगा। यह कदम इसलिए जरूरी है क्योंकि उत्तम गैल्वा भी बैंक की डिफॉल्टर है और उसे भी कर्ज निपटान के लिए एनसीएलटी के पास भेजा गया है। उत्तम गैल्वा पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का करीब 62 अरब रुपये का बकाया है। इस बारे में एनएल मित्तल का पक्ष जानने के लिए उन्हें ई-मेल किया गया लेकिन समाचार पत्र के छपने जाने तक उनका जवाब नहीं आया। कर्जदाताओं का कहना है कि आईबीसी की धारा 29ए के मुताबिक चूककर्ता कंपनी में हिस्सेदारी होना मित्तल की राह में बड़ी अड़चन है।

Source:Agency

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