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इलेक्ट्रिक वाहन ही सबकुछ नहीं

By Outcome.c :05-02-2018 09:20


भारत में बिकने वाली आधी कार मारुति सुजूकी की होती है और कंपनी मानती है कि अकेले इलेक्ट्रिक वाहन देश की ऊर्जा व उत्सर्जन की चुनौतियों का समाधान नहीं कर सकता। ऐसे में कंपनी की रणनीति इलेक्ट्रिक व हाइब्रिड वाहनों का मिश्रित रूप पेश करने की होगी। कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी केनिची आयोकावा ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, हम हालांकि इलेक्ट्रिक वाहन का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं, लेकिन रातोरात चीजें बदलने में मुश्किल होती है। कंपनी ने हाल में ऐलान किया था कि वह भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक कार साल 2020 में उस साझेदारी के जरिए पेश करेगी, जो मूल कंपनी सुजूकी ने जापानी कंपनी टोयोटा के साथ की है। यह फैसला तब हुआ जब भारत सरकार ने वाहन निर्माताओं को पर्यावरण अनुकूल वाहन बनाने पर जोर देना शुरू किया।

उन्होंने कहा, 10 साल बाद सभी कारों को इलेक्ट्रिक में तब्दील करना काफी मुश्किल होगा। अगर तकनीक किफायती होता है और हमारे पास बुनियादी ढांचा हो तो यह अलग कहानी होगी। लेकिन भारत बड़ा देश है और एक छोर से दूसरे छोर जाना आसान नहीं है। बड़े शहरों के बाहर हमें डीजल व पेट्रोल कार का इस्तेमाल करना होता है। उन्होंने कहा, पेट्रोल व डीजल कार की कार्यक्षमता में सुधार का एकमात्र समाधान हाइब्रिड हो सकता है।

हाइब्रिड पर जोर

आयुकावा ने कहा, ईंधन की कार्यक्षमता में सुधार और गाडिय़ों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए हमारा मानना है कि हाइब्रिड तकनीक एक विकल्प है। हम भविष्य में अपने वाहनों में इस तकनीक पर जोर देंगे। कंपनी का मानना है कि हाइब्रिड तकनीक कार्यक्षमता में सुधार के अलावा इलेक्ट्रिक कार की लागत घटाएगी क्योंकि दोनों तकनीक में एक जैसी बैटरी, मोटर और कुछ कलपुर्जों का इस्तेमाल होता है। आयुकावा ने दावा किया, इलेक्ट्रिक वाहनों में ये एक जैसे होते हैं। हाइब्रिड से कलपुर्जे के स्थानीय उïत्पादन में इजाफा करने में मदद मिलेगी। अभी कंपनी तीन कारों सियाज, एस क्रॉस और अर्टिगा के हाइब्रिड मॉडल भी पेशकश करती है।  सरकार ने पिछले साल जीएसटी लागू करते समय हाइब्रिड वाहन पर 15 फीसदी उपकर लगाया था। आयुकावा ने कहा, हम लगातार सरकार से उपकर कम करने का अनुरोध कर रहे हैं। हम हाइब्रिड तकनीक के महत्व की जानकारी दे रहे हैं जो देश की ऊर्जा सुरक्षा व पर्यावरण को सुधार सकता है क्योंंकि इलेक्ट्रिक वाहन अचानक नहीं आ सकता।
वास्तविक नजरिये की दरकार 

आयुकावा ने कहा, कंपनी सरकार से इलेक्ट्रिक वाहन पर वास्तविक नजरिये की उम्मीद करती है। हमें इसकी व्यवहार्यता तय करने के लिए अध्ययन करना चाहिए। पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए बड़ा बदलाव है। हमने 2020 तक इलेक्ट्रिक वाहन लाने का ऐलान किया है। हालांकि वाहन के अलावा हमें विस्तृत माहौल की दरकार होगी। यह आसान नहीं है। अगर कामयाबी हासिल करनी है तो उद्योग, सरकार, ग्राहक और व्यवस्था में बदलाव लाना होगा। मारुति सुजूकी को इलेक्ट्रिक वाहन को आगे बढ़ाने में इसकी कीमत एक अन्य चिंता दिख रही है।
इलेक्ट्रिक वाहन में स्थानीय चीजें हो

आयुकावा ने कहा, सरकार की नीति स्पष्ट तौर पर मेक इन इंडिया के हक में है। यह सिर्फ कार पर नहीं बल्कि कलपुर्जा पर भी लागू होती है। जहां तक संभव हो हमें स्थानीय तौर पर उत्पादन करना होगा। यह हमारी जिम्मेदारी व लक्ष्य दोनों होगा। हमें स्थानीय विनिर्माण पर विचार करना होगा, अन्यथा हमारे कलपुर्जा उद्योग व रोजगार को झटका लगेगा।

Source:Agency

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