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कांग्रेस में युवा राज

By Outcome.c :05-12-2017 07:00


कौन बनेगा कांगे्रस अध्यक्ष? इस सवाल का जवाब जानने के लिए न आडियंस पोल की आवश्यकता है, न ही 50-50 के आप्शन की। यह तय है कि 19 दिसम्बर को इस 132 साल पुरानी पार्टी पर नए अध्यक्ष के रूप में राहुल गांधी विराजमान होंगे। आज यानी 4 दिसम्बर को उन्होंने अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए विधिवत नामांकन दाखिल कर दिया। कांग्रेस या कोई भी राजनीतिक दल किसे अपना अध्यक्ष बनाता है, यह उसका अंदरूनी मसला है। लेकिन कांग्रेस पर तो इस वक्त सारे देश की निगाहें टिकी हैं।

मीडिया के तथाकथित दिग्गजों और भाजपा के नेताओं ने तो कांग्रेस अध्यक्ष के इस चुनाव को राष्ट्रीय महत्व का विषय बना दिया। हमेशा की तरह इस बार भी वंशवाद, परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप कांग्रेस पर मढ़ दिया। जबकि अब ऐसा कहने का कोई अर्थ नहींं रह गया है, क्योंकि वामदलों को छोड़कर हर दल में संतानों और रिश्तेदारों को आगे करने की परिपाटी बन गई है। गांधी परिवार पर वंशवाद का आरोप लगाने वाले भाजपा के नेता क्या यह शपथपत्र भरकर राजनीति में उतरे हैं कि उनके बच्चे भाजपा में आगे नहीं बढ़ेंगे? खुद भाजपा में कई सांसद, विधायक ऐसे हैं, जिनकी राजनीतिक योग्यता इतनी ही है कि उनके माता-पिता भाजपा के नेता रहे हैं। लेकिन कांग्रेस पर यह आरोप लगाना तो मानो राजनैतिक फैशन बन गया है। इसलिए आज जब राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष के लिए नामांकन भरा तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन पर तंज कसा कि औरंगजेब राज उन्हीं को मुबारक।

दरअसल वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर ने राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने की तुलना मुगलकाल से की थी, तो नरेन्द्र मोदी को इसी आधार पर राहुल गांधी पर कटाक्ष करने का मौका मिला। लेकिन मुगलकाल में वे हुमायूं, अकबर, शाहजहां, जहांगीर किसी से भी राहुल गांधी की तुलना कर सकते थे, उन्होंने औरंगजेब का उदाहरण ही क्यों लिया, यह समझने वाली बात है। क्या इसलिए कि औरंगजेब की छवि हिंदू विरोधी है और गुजरात चुनाव में राहुल गांधी का मंदिर-मंदिर जाना भाजपा को खटक रहा है? क्या नरेन्द्र मोदी के पास गुजरात चुनाव में मतदाताओं से कहने के लिए और कोई विषय नहींं रह गया, जो वे कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव की चर्चा अपनी रैली में कर रहे हैं? यह सही है कि राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बनते हैं तो इस पद पर नेहरू-गांधी परिवार के वे छठे सदस्य होंगे। मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी उनके पहले कांग्रेस अध्यक्ष पद संभाल चुके हैं। इनमें सोनिया गांधी 19 सालों तक कांग्रेस अध्यक्ष रही हैं, जबकि जवाहरलाल नेहरू 11 साल, इंदिरा गांधी सात साल, राजीव गांधी छह साल और मोतीलाल नेहरू 2 सालों के अध्यक्ष रहे हैं। इस परिवार के पास 132 सालों में कुल 45 साल कांग्रेस पार्टी की कमान रही, फिर भी राजनैतिकविरोधी यही कहते रहे कि कांग्रेस पार्टी नहीं कुनबा है। अगर ऐसा है तो शेष 87 बरसों में कांग्रेस किन लोगों ने चलाई, इस पर बात क्यों नहीं होती। 

 
बहरहाल, राहुल गांधी कल राजनीति में आए होते और आज उन्हें यह पद दे दिया जाता, तो वंशवाद का आरोप लगाना उचित होता। लेकिन वे 2004 से सक्रिय राजनीति में उतरे हैं और तब से लगातार अमेठी से सांसद निर्वाचित हुए हैं। 10 सालों तक केेंद्र पर यूपीए का शासन रहा, लेकिन तब राहुल गांधी ने कोई पद नहीं लिया। उनके विरोधी कभी नौसिखिया, कभी राजकुमार, कभी पप्पू जैसे विशेषणों से उनका मजाक उड़ाते रहे। सदन में उनके भाषणों की खिल्ली उड़ाई गई और चुनावी मैदान में यह कहकर नीचा दिखाया गया कि वे जहां जाते हैं, वहां हार मिलती है। कांग्रेस की कमान उन्होंने हाथ में नहीं ली, तब भी हार का ठीकरा उनके सिर पर फोड़ा गया, तो इस बात पर अब आपत्ति क्यों हो रही है कि वे कांग्रेस अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। यूं भी कई सालों से उन पर दबाव था कि वे आगे बढ़कर जिम्मेदारी लें। लेकिन उन्होंने कोई हड़बड़ी नहीं दिखाई। इस बीच कई चुनाव हुए, जिनमें कई में कांग्रेस को हार मिली, लेकिन कुछ जगह जीत और कुछ में अच्छा प्रदर्शन रहा। अब गुजरात चुनाव सामने है, जिसमें चाहे अनचाहे भाजपा राहुल गांधी के साथ ही मुकाबला कर रही है। मोदी की तरफदारी में लगा मीडिया, कितनी भी कोशिश कर ले, उसे राहुल गांधी को मजबूरन कवरेज देना ही पड़ रहा है। राजनीति में राहुल गांधी का यह उभार अगर उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष होने के योग्य बनाता है, तो विपक्षियों को किस बात की तकलीफ हो रही है?

राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के साथ ही कांग्रेस में युवाओं का नया दौर शुरु होगा। पुराने नेताओं में से कुछ को हो सकता है, नए नेतृत्व के साथ तालमेल बिठाने में तकलीफ हो। नए नेताओं में भी कुछ विघ्नसंतोषी हो सकते हैं। अब यह राहुल गांधी के राजनीतिक कौशल पर निर्भर करेगा कि किस तरह वे सबको साथ लेकर चलते हैं और कांग्रेस में नई जान फूंकते हैं। 
 

Source:Agency

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